
कुछ महीने पहले हुई थी बाघ की शिकार: गड़चिरोली जिले में एक स्थान पर मिले थे छह ‘पंजे वाले फंदे’।
(पिछले साल जून महीने में गड़चिरोली और चंद्रपुर जिलों में बाघ का शिकार किया गया था।)
जिला प्रतिनिधी (यश कायरकर) :
वर्तमान में चंद्रपुर और गड़चिरोली जिलों में चल रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे और इसके बारे में अखबारों और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अतिशयोक्तिपूर्ण खबरें स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। खासकर रात के समय वाहनों में घूमने वाले शौकिया पर्यटक जंगल में बाघ देखने के लिए आते हैं और उनकी तस्वीरें-वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते हैं। इसके चलते शिकारी आसानी से बाघ की लोकेशन तक पहुंच जाते हैं और उसी स्थान पर शिकार करना उनके लिए आसान हो जाता है।
ऐसा ही एक मामला पिछले साल 28 जून 2023 को आसाम में सामने आया था, जब शिकारी समूह के पास से बाघ की खाल बरामद हुई थी। जांच के दौरान पता चला कि गड़चिरोली और चंद्रपुर जिलों के जंगलों में सोशल मीडिया पर मिली जानकारी का उपयोग करके सावली तालुका में बाघ का शिकार किया गया था। इसलिए, वन विभाग को जंगलों में घूमने वाले संदिग्ध लोगों पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है।
मिली जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुरी वन विभाग के तालोधी बाल और आसपास के कुछ क्षेत्रों में बालाघाट इलाके से आए कुछ मजदूर बांस काटने के लिए जंगलों के पास मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि इन्हें स्थानीय व्यापारी ने मजदूरी के लिए बुलाया है, लेकिन वन विभाग को इनकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई है। न ही इनके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या अन्य दस्तावेज ठेकेदार द्वारा विभाग को सौंपे गए हैं। इसलिए वन विभाग को इन पर सतर्क नजर रखनी होगी ताकि शिकार की घटनाओं को रोका जा सके।
आसाम के कानून के कारण आरोपी जेल में, लेकिन महाराष्ट्र में आसानी से मिल जाता है जमानत।
महाराष्ट्र में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत बाघ की शिकार के लिए 7 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि असम में यह सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है। इसके अलावा, आसाम में यह अपराध गैर-जमानती है, जबकि महाराष्ट्र में आरोपी आसानी से जमानत पर रिहा हो जाते हैं।
कल्ला और रूमाली गिरोह चंद्रपुर और गड़चिरोली में कापड़े की थैलियां बेचने के बहाने करते हैं रेकी।
16 अक्टूबर 2023 को विदर्भ में बाघ के शिकार के एक मामले में गिरफ्तार आरोपी जमानत पर रिहा हो गए। महाराष्ट्र में वन्यजीव कानून की कमजोर धाराओं के कारण गड़चिरोली और चंद्रपुर में पकड़े गए आरोपियों को जमानत मिल गई। “कल्ला” और “रूमाली” जैसे गिरोह जनवरी 2023 से कापड़े की थैलियां बेचने के बहाने इन जिलों में रेकी कर रहे थे।
28 जून 2023 को असम में बहेलिया गिरोह के पास से बाघ की खाल बरामद होने के बाद इनका कनेक्शन चंद्रपुर और गड़चिरोली के शिकार से जोड़ा गया। सावली वनपरिक्षेत्र के व्याहाड़ खुर्द इलाके में दो बाघों की हत्या के आरोप में 5 लोगों को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था।
कुराड़ और भाले का उपयोग करके बाघों को क्रूरता से मारा गया।
शिकारी लोहे के फंदे का उपयोग करके बाघ को फंसाते थे। एक बार फंदे में फंसने के बाद, बाघ पर लकड़ी के लट्ठे से सिर पर हमला किया जाता था ताकि उसकी खाल खराब न हो। थकावट के बाद जब बाघ जोर से गरजता था, तो उसके मुंह में लोहे का भाला डालकर उसे मारा जाता था।
गुवाहाटी से पांच लोगों की हुई थी गिरफ्तारी।
जुलाई 2023 में गुवाहाटी से पांच लोगों को बाघ के शिकार के मामले में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने गड़चिरोली और चंद्रपुर जिलों में किए गए शिकार के बारे में जानकारी दी थी।
संगठित शिकार गिरोहों की सक्रियता के चलते बढ़ाई गई गश्त।
सातपुड़ा सहित अन्य व्याघ्र परियोजनाओं के आसपास संगठित शिकार गिरोहों की सक्रियता के कारण ताडोबा, पेंच, और चंद्रपुर जैसे क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई है। राज्य में वन्यजीव कानूनों में सख्ती और समन्वय की आवश्यकता है ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
